Saturday, April 29, 2023

जहाँ शाह वहाँ राह: पूर्वोत्तर की समस्याओं का स्थाई समाधान निकालते अमित शाह | BCR NEWS

अजय शास्त्री 

बीसीआर न्यूज़/नई दिल्ली: केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह की उपस्थिति में असम और अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्रियों ने आज अंतर-राज्यीय सीमा समझौता पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के तहत 123 गाँवों को लेकर चल रहे पुराने सीमा विवाद को आखिरकार खत्म कर दिया गया। उन्होंने कहा, 'यह ऐतिहासिक समझौता एक बड़ी उपलब्धि है। हमारा मुख्य उद्देश्य पूर्वोत्तर राज्यों को शांतिपूर्ण, विकसित और संघर्ष मुक्त बनाना है। यह समझौता जहाँ पूर्वोत्तर के खोए हुए गौरव को बहाल करेगा, वहीं प्रगति के नए मार्ग प्रशस्त करेगा।’

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह के मार्गदर्शन में पिछले 9 वर्षों में पूर्वोत्तर में सभी समस्याओं का समाधान निकाल कर शांति और विकास के एक नए युग की इबारत लिखी जा रही है। आजादी के बाद 1972 से लेकर आज तक जिस 800 किमी लंबे असम-अरुणाचल सीमा विवाद को किसी भी सरकार ने सुलझाने की कोशिश नहीं की, उस ऐतिहासिक विवाद  निपटाकर अमित शाह ने साबित किया है कि वो वास्तव में भारतीय राजनीति के चाणक्य हैं। आजादी के बाद जिस समस्या का समाधान हो जाना चाहिए था, उसका समाधान आज 75 साल के बाद अमित शाह के दिशा-निर्देश में गृह मंत्रालय कर रहा है।

50 से अधिक बार पूर्वोत्तर का दौरा करने वाले मोदी जी के विकसित पूर्वोत्तर, शांत पूर्वोत्तर और विवाद मुक्त पूर्वोत्तर के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में निरंतर जुटे अमित शाह के मार्गदर्शन में 2019 में एनएलएफटी समझौता, 2020 में ब्रू समझौता, 2021 में बोडो समझौता, 2022 में कार्बी समझौता, आदिवासी शांति समझौता, असम-मेघालय के 67% अंतरराज्यीय सीमा विवाद का समझौता, 2022 में असम-अरुणाचल सीमा विवाद समझौता और आज 2023 में 800 किमी लंबे असम-अरुणाचल सीमा के निपटारे से पूरे पूर्वोत्तर का कायाकल्प हो रहा है। पिछले चार वर्षों में पूर्वोत्तर राज्यों में किया गया यह आठवाँ समझौता है।

आँकड़ों के मुताबिक संकल्प से सिद्धि के 9 सालों में मोदी-शाह की नीतियों के कारण पूर्वोत्तर में 8000 से ज्यादा युवा हथियार छोड़कर मुख्यधारा में शामिल हो चुके हैं। पूरे पूर्वोत्तर में हिंसा में लगभग 67% की कमी, सुरक्षा बलों के मृत्यु में 60% की कमी और नागरिकों की मृत्यु में 83% की कमी आई है। जहाँ असम के 70% क्षेत्र, मणिपुर के 6 जिले के 15 पुलिस स्टेशन और नागालैंड के सात जिलों को अफ्सपा से मुक्त कर दिया गया है, वहीं त्रिपुरा और मेघालय को पूरी तरह से अफ्सपा से मुक्त कर दिया गया है जो साबित करता है कि देश अमृतकाल में प्रवेश कर चुका है।   

मोदी जी के नेतृत्व में नए भारत के निर्माण में जुटे अमित शाह के अथक प्रयासों और कुशल रणनीतियों का नतीजा है कि समग्र पूर्वोत्तर में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास और औद्योगिक निवेश सहित सीमा से सटे गाँवों का चौतरफा विकास हो रहा है।


Monday, December 12, 2022

Manoj Tiwari बोले लक्ष्मी के बाद सरस्वती आई घर में, 51 साल की उम्र में तीसरी बार बने पिता, पत्नी संग शेयर की पहली तस्वीर, | BCR NEWS

अजय शास्त्री 

बीसीआर न्यूज़/नई दिल्ली। भोजपुरी के फिल्मों के सुपरस्टार और बीजेपी सांसद मनोज तिवारी 51 साल की उम्र में तीसरी बार पिता बने हैं। उन्होंने ट्वीट कर बताया कि सुरभि तिवारी ने एक बेटी को जन्म दिया है। मनोज तिवारी ने सोशल मीडिया पर एक तस्वीर पोस्ट की है, जिसमें उनकी पत्नी हॉस्पिटल के बेड पर लेटी हुई हैं और उन्होंने बताया कि आज ही घर में किलकारी गूंजी है और पत्नी सुरभि ने एक बेटी को जन्म दिया है। 

तीसरी बार पिता बने मनोज तिवारी

पिछले महीने ही मनोज तिवारी के घर पत्नी की गोद भराई की रस्में निभाई गई थीं। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर करके फैंस को सरप्राइज दिया था। इस पोस्ट के बाद ही लोगों को पता चला कि वो पिता बनने वाले हैं। फैंस इंतजार करने लगे कि बच्चे का जन्म कब होगा।

घर में आई नन्ही परी

मनोज तिवारी ने एक पोस्ट शेयर की, जिसमें पत्नी सुरभि तिवारी अस्पताल के बेड पर लेटी हुई हैं। इसके साथ कैप्शन में उन्होंने लिखा,‘बड़े हर्ष के साथ सूचित करना है कि मेरे घर में लक्ष्मी के बाद सरस्वती का आगमन हुआ है..आज घर में प्यारी सी बिटिया आई है.. उस पर आप सभी का आशीर्वाद बना रहे.. सुरभि-मनोज तिवारी'।  

साल 2020 में की थी शादी 

मनोज तिवारी को इस पोस्ट पर बधाई देने वालों का तांता लग गया।बता दें कि सुरभि, मनोज तिवारी की दूसरी पत्नी हैं। इससे पहले उनकी पहली पत्नी रानी से उनका रिश्ता लंबा नहीं चला और दोनों ने तलाक ले लिया। रानी और मनोज की एक बेटी भी है रीति तिवारी। साल 2020 में मनोज तिवारी ने सुरभि संग शादी कर ली और इसी साल के अंत में उनके घर एक बेटी का जन्म का हुआ।  

Saturday, December 10, 2022

पांच तत्वों में लीं हुई Lavani Queen Sulochna Chawhan 'लावणी क्वीन' सुलोचना चव्हाण, PM मोदी सहित अनेकों ने दी श्रद्धांजलि | BCR NEWS

अजय शास्त्री (प्रकाशक व संपादक)

बीसीआर न्यूज़/मुंबई: Lavani Queen सुलोचना चव्हाण की मौत, मराठी संगीत की दुनिया के लिए एक बड़ा झटका है। उन्हें अपने गीतों के लिए पद्मश्री से भी सम्मानित किया गया था। PM मोदी ने भी उनकी मृत्यु पर दुख व्यक्त किया है।


पद्मश्री से सम्मानित थीं 'लावणी समरदनी' सुलोचना ताई। 

सुलोचना चव्हाण को लोग 'लावणी समरदनी' यानी लावणी की रानी के रूप में जानी जाने वाली, सुलोचना चव्हाण इस पारंपरिक महाराष्ट्रीयन संगीत शैली में सबसे प्रसिद्ध गायिकाओं में से एक थीं। उन्होंने न सिर्फ मराठी फिल्मों के कई गानों को अपनी आवाज दी थी बल्कि, लोक रंगमंच और महाराष्ट्र का फेमस फोक म्यूज़िक और फोक थिएटर 'तमाशा' से भी जुड़ी हुई थीं।

PM मोदी ने दी श्रद्धांजलि। 

'लावणी समरदनी' की मौत पर प्रधानमंत्री मोदी ने भी अपनी श्रद्धांजलि व्यक्त की है। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने उनकी याद में ट्वीट किया और लिखा, “आने वाली पीढ़ियां सुलोचना ताई चव्हाण को और महाराष्ट्र, विशेष रूप से लावणी की संस्कृति को बढ़ावा देने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका के लिए याद रखेंगी। उन्हें संगीत और रंगमंच का भी शौक था। उनके निधन से आहत हूं। उनके परिवार और प्रशंसकों के प्रति संवेदना। शांति।"

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी दी श्रद्धांजलि। 

बता दें कि सुलोचना ताई की मौत पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने भी शोक व्यक्त किया है।मुख्यमंत्री शिंदे ने अपने शोक संदेश में कहा कि चव्हाण के निधन से लावणी, लोक कला और संगीत के क्षेत्र में एक शून्य पैदा हो गया है।

राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने दी श्रद्धांजलि। 

महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने कहा कि "श्रीमती सुलोचना-ताई चव्हाण लावणी की निर्विवाद महारानी थीं। उन्होंने कविता में जीवन का संचार किया और अपनी अनूठी आवाज और उच्चारण के बल पर कई लावणियों को अमर कर दिया। उनकी खूबसूरत आवाज कई और सालों तक जीवित रहेगी। मैं महान गायक को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं और श्री विजय चव्हाण और शोक संतप्त परिवार के अन्य सदस्यों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करता हूं। ”