फिल्में, मनोरंजन और मस्ती की पाठशाला
दिल्ली में अद्भुत अनुभव देकर अन्य शहरों की यात्रा पर अग्रसर हुआ फिल्म समारोह!!
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अजय शास्त्री (संपादक) बॉलीवुड सिने रिपोर्टर
Email: editorbcr@gmail.com
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शोमैन सुभाष घई, सुधीर मिश्रा, हंसल मेहता, अनुभव सिन्हा, विक्रमादित्य मोटवानी और राहुल भट्ट की उपस्थिति में शुरू हुए इस समारोह में चारों ही दिन प्रदर्शित की जा रही फिल्मों से जुड़ी हस्तियों ने शिरकत की साथ ही फिल्मों के उपरान्त दर्शकों से रूबरू होकर वाह-वाही लूटी और उनके सवालों के जवाब भी किये। इन हस्तियों में निर्देशक श्याम बेनेगेल, टी.पी. अग्रवाल, संदीप वर्मा, संजीव गुप्ता, टी हरिहरन, राजेन्द्र तलक, फिरोज़ अब्बास खान सहित एक्टर रजत कपूर, विजय राज व पवल मल्होत्रा आदि प्रमुख थे।
जे.एफ.एफ. के माध्यम से दर्शकों सहित सिनेमा में नये आयाम कायम करने की पहल की गई जिनमें ‘कंट्री फोकस’ श्रेणी में साइप्रस जैसे अल्पज्ञात देश की फिल्मों को दर्शाना। ‘सिनेमा आॅफ द अपराईजिंग’ श्रेणी में मानवीय आजादी के लिए लड़ी जा रही लड़ाईयों पर बनी फिल्मों का प्रदर्शन भी आकर्षण का केन्द्र रहे। इसके अतिरिक्त जागरण शाॅर्ट श्रेणी में स्कूली छात्रों से लेकिन प्रतिभाशाली व प्रयोगधर्मी युवा फिल्मकारों को अपने कला-कौशल को प्रस्तुत करने का मौका मिला।
मनोरंजन के साथ-साथ मस्ती की पाठशाला भी फेस्टिवल का हिस्सा रही जहां फिल्म जगत के मास्टर निर्देशक व अन्य ने ‘कास्टिंग निर्देशक क्या चाहता है’, ‘सिनेमा में निवेश’, ‘क्या स्वतंत्र सिनेमा बालीवुड पर कब्जा कर रहा है?’ किरीट खुराना के साथ ‘एनिमेशन स्टोरी टेलिंग’ पर, नये फिल्मकारों के लिए ‘लघु फिल्मों से शुरुआत’ पर और ‘सिनेमा के बारे में लिखना’ जैसे विषयों पर चर्चा हुई और युवाओं व अन्य उत्सुक श्रोताओं ने दिग्गजों से सवाल-जवाब भी किया।
फेस्टिवल की औपचारिक शुरूआत अनुराग कश्यप की फिल्म ‘अग्ली’ से हुई। इसके बाद नेताजी सुभाष चन्द्र बोस, क्या दिल्ली क्या लाहौर, गुलाब गैंग, मद्रास कैफे, हाईवे, क्वीन, क्यू, शाहिद, आंखो देखी, देख तमाशा देख, मंजूनाथ आदि जैसी फिल्मों को दर्शकों ने जमकर सराहा। इनकी एक विशिष्ट बात यह रही कि फिल्मकारों ने भी दर्शकों के बीच बैठकर अपनी फिल्मों को देखा।
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किरीट खुराना ने भारत में ऐनीमेशन फिल्मों के उज्जवल भविष्य पर बात करते हुए युवाओं को सशक्त अंदाज में स्टोरीटेलिंग की बात पर ध्यान देने का सुझाव दिया। समारोह के दौरान सुधीर मिश्रा ने भी दर्शकों के साथ अपने अनुभव साझा किये, चर्चा के दौरान उन्होंने कास्टिंग के विभिन्न पहलुओं पर भी बातचीत की।
जागरण समूह के वाइस प्रेसिडेंट बसंत राठोड़ ने बताया कि पिछले चार संस्करणों की तरह इस वर्ष भी हमें दिल्ली में जबरदस्त उत्साह व प्रतिक्रिया मिली है। फिल्म फेस्टिवल का उद्देश्य प्रेरणादायी फिल्मों को जनमानस तक पहुंचाना और फिल्मों के प्रति समाज में रुचि पैदा करना है और यह पहला अंतर्राष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल है जो लोगों तक उनके शहरों में जाकर पहुंचता है और उनके सहज माहौल में सिनेमा दिखाता है।
दिलवाले दिल्लीवासियों ने चार दिन के समारोह को हाथों-हाथ लिया और अपनी तरह के अद्भुत अनुभव देते इस समारोह का हिस्सा बने। दिल्ली के बाद जे.एफ.एफ. अब 14 अन्य शहरों की यात्रा पर अग्रसर होकर सितम्बर में मुम्बई में सम्पन्न होगा।
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