Sunday, September 21, 2014

आर्यन सक्सेना की कलम से निकली "देसी कट्टे"



आर्यन सक्सेना की कलम से निकली "देसी कट्टे"  
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आफ़ाक़ खान ‘समीर‘ 
(ब्यूरो चीफ-दिल्ली/एनसीआर)
बॉलीवुड सिने रिपोर्टर 
Email.: editorbcr@gmail.com
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दोस्त के लेखकीय प्रोत्साहन से प्लेबैक सिंगर की बजाय लेखक बन गया: आर्यन सक्सेना 
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बीसीआर (नई दिल्ली/एनसीआर) फिल्म 'देसी कटटे' के लेखक आर्यन सक्सेना से "बालीबुड सिने रिपोर्टर" के विशेष संवाददाता आफ़ाक़ खान ‘समीर‘ का एक्सक्लुसिव साक्षात्कार. एक हिन्दी फिल्म का बहुत ही लोकप्रिय गाना है ‘निकले थे कहां जाने के लिए, पहुंचेगे कहां मालूम नही‘। वाकई जिंदगी में  बहुत कुछ ऐसा होता है कि हम करना तो कुछ चाहते हैं लेकिन होता कुछ और ही है। बनना हम कुछ चाहते हैं लेकिन हमारी किस्मत में बनना कुछ और ही लिखा होता है। ख़ासकर ऐसा उन लोगों के साथ ज्यादा हुआ है जो फिल्म लाइन में अपना करियर बनाने के लिए दूसरे राज्यों से मायानगरी मुंबई पहुंचे और अपनी चाहत के विपरीत उनके करियर को पहचान मिली। मसलन मुकेश गये थे हीरी बनने बन गये गायक, किशोर दा बनना चाहते थे एक्टर लेकिन पहचान मिली एक पाश्र्व गायक के रूप में।
ऐसा ही कुछ इत्तेफ़ाक 26 सितम्बर को रिलीज होने वाली फिल्म ’देसी कटटे’ के लेखक आर्यन सक्सेना के साथ हुआ। करीब डेढ दशक पूर्व अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद आर्यन सक्सेना उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जनपद से दिल में एक पार्श्व  गायक बनने की हसरत लिये मायानगरी मुंबई पहुंचे थे। जीवन में लक्ष्य पाने के लिए अपनी धुन के पक्के आर्यन सक्सेना जी वर्षो फिल्म इंडस्ट्री में संघर्ष करते रहे और गायकी में अपनी पहचान बनाने के लिए अपनी किस्मत आजमाते रहे। अपनी मेहनत, लगन और प्रतिभा के बल पर खुद को समय-समय पर साबित भी किया लेकिन कोई गाॅडफादर न मिलने से वह मुकाम हासिल नहीं कर सके जिसके वे हक़दार थे। उन्हें दरकार थी तो उस घडी कि जिसमें वे अपना सर्वश्रेष्ठ प्रस्तुत करके खुद को साबित कर सके।
फिल्म "देसी कटटे" के लेखक आर्यन सक्सेना से "बालीबुड सिने रिपोर्टर" के विशेष संवाददाता "आफ़ाक़ खान ‘समीर‘" का एक्सक्लुसिव साक्षात्कार में अपने करियर से जुडे अनेक अनछुए पहलुओं पर बेबाकी से चर्चा की। प्रस्तुत है उनसे हुई बातचीत के मुख्य अंश:-
बीसीआर- आप गायक बनने की बजाय लेखन के क्षेत्र में कैसे आ गये ?
आर्यन - दरअसल संघर्ष के समय अधिकांश साथी लेखन से जुडे थे। एक दिन उनमें से एक दोस्त ने कहा कि यार क्या गायकी के ही पीछे पडे हो, तुममे एक लेखक छुपा हुआ है। अपनी इस लेखकीय प्रतिभा का इस्तेमाल क्यों नही करते ? फुरसत के समय कुछ कहानी, वार्तालाप आदि लिखा करो, देखना जल्द ही एक दिन सारी इंडस्ट्री में बतौर लेखक आपके नाम का डंका बजना तय है। भले ही दोस्त ने ये बातें उसने प्रोत्साहित करने के लिए कहीं थी लेकिन ये बातें मेरे दिल में उतर गयीं। मैंने लेखन के बारे में गंभीरता से सोचा और परिणाम आपके सामने है। मेरी लिखी हुई फिल्म ’देसी कटटे’ इसी माह 26 तारीख को रिलीज होने वाली है। 
बीसीआर- आपको अपनी इस फिल्म से क्या उम्मीद है ?
आर्यन - मुझे पूरी उम्मीद है कि यह फिल्म दर्शको को बहुत पसंद आएगी। यह फिल्म समाज को एक सकारात्मक संदेश देगी।
बीसीआर- फिल्म में कौन-कौन हीरो-हीरोइन है ?
आर्यन - इस फिल्म में अखिल कपूर व जय भानुशाली मुख्य भूमिका में हैं जबकि सुनील शेटटी की भी महत्वपूर्ण रोल है। अखिल कपूर नया हीरो है। उनकी ये पहली फिल्म है। अखिल फिल्म इंडस्ट्री में पले पढे है। वे सुविख्यात एक्टर विनोद खन्ना के भांजे हैं। इस फिल्म में एक नई हीरोइन को भी मौका मिला है। शाशा आगा खान व टीया वाजपेयी दो प्रमुख नायिकाएं हैं। इनमें शाशा पाश्र्व गायिका सलमा आगाा की बेटी है। टीया पहले भी कई और फिल्मों में काम कर चुकी है। उसकी हाल ही में 'हांटेंड' और 'आइडेंटिटी कार्ड' फिल्म आयी थी।
बीसीआर- फिल्म की कहानी के बारे में कुछ बताइये ?
आर्यन - फिल्म की कहानी दो अनाथ लडको की है। जो बचपन में ही अपराध की दुनिया में सक्रिय हो जाते है और अवैध हथियार के कारोबार से जुड जाते हैं। ये दोनो शार्प शूटर होते हैं। सुनील शेटटी एक शूटिंग रेंज के कोच की भूमिका में हैं। वे दोनो को निशानेबाजी की ट्रेनिंग देते है। इनमें से एक लडका अच्छी संगत के कारण एक इंसान बन जाता है जबकि दूसरे का रिश्ता जरायम की दुनिया से होने के बावजूद दोनो की दोस्ती बरकरार रहती है। जैसा कि सदियों से चला आ रहा है कि बुराई का अंजाम बुरा ही होता है। सही संदेश इस फिल्म में देने की कोशिश की गयी है। मुुझे पूरा विश्वास है कि फिल्म दर्शको पर अपनी छाप छाप छोडने में कामयाब होगी। 
और एक खास बात हम आपको बताते हैं कि सुनील शेट्टी (अन्ना) और आर्यन सक्सेना एक दूसरे से बहुत- बहुत प्यार करते हैं.
नोट: बॉलीवुड सिने रिपोर्टर (बीसीआर न्यूज़) की समस्त टीम की और से फिल्म "देसी कट्टे" की सफलता की हार्दिक शुभकामनाये 


सिंगर सागरिका देब 'राजीव गांधी एक्सीलेंस अवार्ड' से सम्मानित

सिंगर सागरिका देब 'राजीव गांधी एक्सीलेंस अवार्ड' से सम्मानित 
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अजय शास्त्री (संपादक) 
बॉलीवुड सिने रिपोर्टर 
Email: editorbcr@gmail.com
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बीसीआर (नई दिल्ली) समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान के लिए, 21 लोगों को इस वर्ष 'राजीव गांधी एक्सीलेंस पुरस्कार' से सम्मानित किया गया है|. इसमे नई दिल्ली की मसहूर पॉप गायिका सागरिका देब शामिल है|
कार्यक्रम 9 सितंबर को नई दिल्ली में 'कंस्टीटूशन क्लब' में आयोजित किया गया था और सागरिका पॉप संगीत, महिला सशक्तिकरण और पशुओं के अधिकारों (एनिमल राइट्स) के अपने उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित की गई| 
इस अवसर पर सागरिका का कहना है, "अपने अब तक के काम के लिए ये सम्मान प्राप्त करना मेरे लिए बोहुत ही गर्व की बात है| इतने सारे सम्मानित हस्तियों के साथ मंच साझा करना मेरे लिए गौरव की बात है| ये जानना की मेरे काम ने कई लोगो को प्रेरणा दी है, खासतौर से लड़कियों को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया है बोहोत की अभिभूत धरना है| में आगे भी इतनी ही लगन से काम करती रहूंगी और उम्मीद करुँगी की आगे भी लोग मेरे काम से प्रेरणा लेंगे| राजीव गांधी एक्सीलेंस अवार्ड से सम्मानित किया जाना मेरे लिए एक सपने की तरह है, और मैं अपने परिवार, टीम मेंबर्स, ऑर्गनाइज़र्स और सिलेक्शन कमिटी को बोहोत बोहोत धन्यवाद अदा करती हुँ|
पुरस्कार विजेताओ को समाज के कुछ प्रतिष्ठित हस्तियों ने सम्मानित किया जिनमें शामिल थे, जेताओं जेपी अग्रवाल (कांग्रेस समिति के पूर्व अध्यक्ष डी पी सी सी), श्रीमती शोभा ओझा ('अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष), श्रीमती ममता शर्मा (राष्ट्रीय महिला आयोग की पूर्व अद्द्यक्ष), श्री के.एच. मुनियप्पा (सांसद / पूर्व केंद्रीय मंत्री भारत सरकार), श्रीमती अर्पित बंसल (मैनेजिंग डायरेक्टर क्रिएटिव नेस्ट) और रामप्रकाश वर्मा (मुख्य संपादक, टाइम्स ऑफ इंडिया समाचार एवं सीमापुरी टाइम्स| 
इस वर्ष पुरस्कार प्राप्त करने वाले अन्य प्रमुख लोगो में शामिल है क्रिकटर चेतन शर्मा, राष्ट्रीय हॉकी कोच एसएएस नकवी, आईएएस अधिकारी संजय अलंग, पुलिस अधिकारी अरविंद कुमार शर्मा, मीडिया पत्रकार अमिताभ श्रीवास्तव, फिल्म निर्माता राकेश बब्बल, और एक्सक्ट्रा|

Saturday, September 20, 2014

मेरा कट फाइनल कट - नाना पाटेकर

 मेरा कट फाइनल कट - नाना पाटेकर
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अजय शास्त्री (बॉलीवुड सिने रिपोर्टर) 
Email:editorbcr@gmail.com ===================
बीसीआर (नई दिल्ली) थेरकथी कलाइकोडम द्वारा प्रस्तुत हिंदी फिल्म फाइनल कट के निर्माता है पाॅल सी.पण्डियन व डाॅ.राजन. इस सस्पेन्स थ्रिलर फिल्म के फ़िल्मी निर्देशक हरफनमौला नाना पाटेकर है. और फाइनल कट करने के लिए तू-तू मै-मै भी कर लेते है निर्माता और फिल्म के एडिटर सभी परेशान हो गए है और सभी लोग नाना को ही फाइनल कट करने का मन बना लिया है. फाइनल कट एक फिल्म की शूटिंग के दौरान रहस्यमय तरीके से हुई हत्या की कहानी है और हत्या के रहस्यों में उलझी गुत्थी को सुलझाने का प्रयास करते नजर आएंगे राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त निर्देशक भारथीराजा. इनके निर्देशन में कई फिल्में आ चुकी हैं जिनमें, प्रमुख हंह व्याथिनी (तमिल), येरा गुलाबी (तेलगू) एवं सोलहवाँ सावन (हिन्दी). गीतकार समीर व संगीत हिमेश रेशमिया का है . नाना पाटेकर, अर्जुन, वतुल सेठ, मंसूर खान, नियामत खान, काजोल एवं रुक्मिणी आदि द्वारा अभिनीत यह खूबसूरत फिल्म है. कला साबू सायरिल की है और छायाकार हैं कन्नन. निर्माता पाॅल सी.पण्डियन की अमेरिका में साफ्टवेयर कम्पनी है और डाॅ. राजन वहाँ के मशहूर हृदय रोग सर्जन हैं। दोनों का सपना, भारतीय फिल्म उद्योग से जुड़ कार्पोरेट स्तर पर काम करने का है.

हैप्पी न्यू ईयर के संगीत लॉन्च

 हैप्पी न्यू ईयर के संगीत लॉन्च
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अजय शास्त्री (बॉलीवुड सिने रिपोर्टर) 
Emai: editorbcr@gmail.com
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बीसीआर (नई दिल्ली) ​हैप्पी न्यू ईयर के संगीत की पेशकश रेड चिलीज एन्टरटेनमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड ने सोमवार, 15 सितंबर 2014 को अपनी फिल्म हैप्पी न्यू ईयर के संगीत का अनावरण किया। इस अवसर पर फिल्म की निर्देशिका फराह खान और कलाकार दीपिका पादुकोण, शाहरूख खान, अभिषेक बच्चन, सोनू सूद, बोमन ईरानी, विवान शाह, संगीत निर्देशक विशाल-शेखर, गीतकार इरशाद कामिल, गायक/गायिका नीति मोहन, कनिका कपूर, सुखविंदर सिंह, डाॅ. जेयूस तथा निर्माता मौजूद थे। 
टेलीविजन जगत की चर्चित हस्तियों ऋत्विक धनराज और कुंवर अमर ने गायिका नीति मोहन के पहले ऐक्ट की पेशकश की। नीति ने मैडले मनवा लागे गीत गाया, जिसके बाद शिलाॅंग क्वाइर द्वारा परफाॅर्मेंस दिया गया। इसके बाद गायक सुखविंदर सिंह ने फिल्म का गीत सटकली गाया। गायिका कनिका कपूर और डाॅ. जेयूस ने अलबम के सबसे कामुक गाने लवली पर परफाॅर्म किया। लंदन के जादूगर कीलन लेजर ने आइपैड पर अपनी जादुई करतबों से समारोह को और अधिक मजेदार बना दिया, लेकिन इस आयोजन का सबसे प्रमुख आकर्षण रहा- फिल्म के कलाकारों का इंडिया वाले गाने पर परफाॅर्मेंस, जिसे काफी पसंद किया जा रहा है। 
हैप्पी न्र्यू इ यर की निर्दे शिका फराह खान ने बताया, ‘‘मेरी सभी फिल्मों में संगीत की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। मैं गानों को ध्यान में रखकर हमेशा फिल्म के दृश्यों के बारे में सोचती हूं। संगीत हमेशा ही कहानी को आगे बढ़ाता है और हैप्पी न्यू ईयर में भी ऐसा ही है, क्योंकि फिल्म में काफी कहानी गानों के माध्यम से बताई गई है। मैं इरशाद भाई कामिल, विशाल-शेखर और सभी गायक/गायिकाओं का शुक्रिया अदा करना चाहती हूं। इन सभी ने शानदार काम किया है। शाहरूख संगीत बनाने में बड़ी प्रेरणा रहे हैं, क्योंकि उनके कई गानें वर्षों से हिट रहे हैं। उन पर फिल्माये जाने वाले गानों के लिये मैं हमेशा ही एक कदम आगे बढ़ जाती हूं।‘‘
गीतकार इरशाद कामिल ने कहा, ‘‘हैप्पी न्यू ईयर पर काम करना एक जश्न का सफर रहा है। मै पार्टी में प्रत्येक संगीत को परिवर्तित करने के लिये फराह खान को धन्यवाद देना चाहता हूं। यह अनुभव निश्चित रूप से जीवन भर काम आयेगा। फिल्म का संगीत जल्द ही लाॅन्च किया जाने वाला है, लेकिन मैं अभी तक इससे बाहर नहीं निकल पाया हूं।‘‘ संगीत निर्देशक विशाल-शेखर ने कहा, ‘‘हैप्पी न्यू ईयर फराह के साथ हमारी तीसरी फिल्म है। फराह हमेशा से हमारे लिये परिवार की तरह रही हैं। फिल्म के संगीत की हर धुन फराह खान की ऊर्जा..., जीवंतता और रंगीनियत का ट्रेडमार्क है। फराह के साथ काम करना हमेशा ही आनंददायक होता है और उनका हमारे ऊपर जो भरोसा है, वह हमें हर बार उनकी अपेक्षाओं को पूरा करने के लिये कड़ी मेहनत करने को प्रेरित करता है। इस तरह की एक प्रसिद्ध रचना के लिये संगीत तैयार करना सम्मान की बात है और इस सफर को भुलाया नहीं जा सकता है। शाहरूख खान के साथ हैप्पी न्यू ईयर हमारी चैथी फिल्म है और हम आज भी कह सकते हैं कि उनकी तरह कोई भी काम नहीं कर सकता है। वह सर्वश्रेष्ठ निर्माता से लेकर सबसे अधिक बहुमुखी परफाॅर्मर भी हैं। और उन्होंने एक बार फिर हमारे संगीत को प्रतिभाशाली कलाकारों के साथ अपने जादू से जीवन दिया है। फिल्म के जिंदगी से बड़े स्तर को बनाये रखने में हैप्पी न्यू ईयर काफी व्यापक है, जिसमें समान रूप से अद्भुत टीम वर्क देखा गया है और इसे वाकई में दिल से बनाया गया है।‘‘ 
रेड चिलीज एन्टरटेनमेंट्स के सीईओ वेंकी मैसूर ने कहा, ‘‘संगीत हमेशा ही भारतीय फिल्म का एक अभिन्न हिस्सा रहा है। हैप्पी न्यू ईयर का संगीत एक अलबम है, जो सभी लोगों को पसंद आयेगा। 
हमें उम्मीद है कि यह सभी लोगों को पसंद आयेगा, क्योंकि संगीत खुशनुमा है और इसे दिल से भूषण कुमार, सीएमडी, टी-सिरीज ने बताया, ‘‘हैप्पी न्यू ईयर ने शाहरूख और मेरे रिश्ते को मजबूत बनाया है। पहला गाना इंडिया वाले नया गान है, जिसे सभी मंचों पर शानदार प्रतिसाद प्राप्त हुआ है और मनवा लागे एक नया प्रेमगीत है, जो काफी हिट हो रहा है। समूचा संगीत अलबम बेहद 
तरोताजगीपूर्ण है और गुनगुनाने योग्य है, जिससे दर्शकों को फिल्म के हर गाने से प्यार हो जायेगा।‘‘ हैप्पी न्यू ईयर एक मजेदार, तेजतर्रार, रंगीन, मजाकिया, ऐक्शन से भरपूर संगीतमय उपहार है। फिल्म का निर्माण रेड चिलीज एन्टरटेनमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा किया गया है और यश राज फिल्म्स द्वारा इसे दुनिया भर में वितरित किया गया है। हैप्पी न्यू ईयर फिल्म को इस वर्ष दीवाली पर हिन्दी, तमिल और तेलुगू भाषाओं में रिलीज किया जायेगा।

मशहूर कार्टून कैरेक्टर छोटा भीम ने दिल्ली के भारतीय विधा भवन स्कूल में आकर बच्चों के साथ की ढ़ेर सारी मस्ती

मशहूर कार्टून कैरेक्टर छोटा भीम ने दिल्ली के भारतीय विधा भवन स्कूल में आकर बच्चों के साथ की ढ़ेर सारी मस्ती
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अजय शास्त्री (बॉलीवुड सिने रिपोर्टर) 
Email:editorbcr@gmail.com
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बीसीआर (नई दिल्ली) ​चैनल पोगो पर आने वाला बच्चों का मशहूर कार्टून कैरेक्टर छोटा भीम ने नई दिल्ली के भारतीय विधा भवन में वहाॅ के बच्चों से मुलाकात की। अपने फेवरेट कार्टून कैरेक्टर को देखकर बच्चे खुशी से झूम उठे और जोर-जोर से छोटा भीम-छोटा भीम चिल्लाने लगें। वहीं इस मौके पर छोटा भीम ने भी बच्चों के साथ जमकर मस्ती की और अलग-अलग अंदाज में फोटो भी खिचवाए। छोटा भीम ने इन छुट्टीयों में फन टूर किया और देश के अलग-अलग शहरों में भारत की सभ्यता और संस्कृति को जानने की कोशीश की। सबसे पहले छोटा भीम करगम तमिलनाडू गयें जहाॅ उन्होने फोक डांस सिखा। फिर पंजाब जाकर बैसाखी देखी। और छोटा भीम और माईटी राजू दोनों आगें भी कई और जगह भी गयें।
गौरतलब है कि पोगो चैनल की तरफ से चलाये गये इस अभियान के अंर्तगत छोटा भीम अपने इस फन टूर में देश के अलग-अलग 9 शहरों के 550 स्कूलों में लगभग 5 लाख से ज्यादा बच्चों से मुलाकात करेंगें। इन 9 शहरों में मुम्बई, दिल्ली, बैंगलोर, चेन्नई, लखनउ, अमृतसर, पंजाब, कोलकाता, पुणे और अहमदाबाद के नाम शामिल हैं। ये अभियान अगस्त से शुरू होकर मध्य सितम्बर तक चलेगी।
इस अभियान के बारें में विशेष जानकारी देते हुए कृष्णा देसाई (एक्जूकेटीव डायरेक्टर हेड किड्स साउथ एशिया, टर्नर इंटरनेशनल इंडिया प्राईवेट लिमिटेड) ने कहा कि ‘‘टर्नर ने इस अभियान को इसलिए भी चलाया है कि ताकि इसके जरिये बच्चे और टीचर में इंडिया को और करीब से जानने में उत्साह मिल सके। छोटा भीम और माईटी राजू के इस फन टूर के जरिये बच्चे और भी करीब से भारत की सभ्यता और संस्कृति के बारें में करीब से जान सकें। मुझे खुशी है कि मेरे इस अभियान के जरिये बच्चों को काफी कुछ सीखने को मिलेगा‘‘।

हृतिक रोशन के इनबॉक्स में फीमेल फैंस के लव लेटर्स की बाढ़

हृतिक रोशन के  इनबॉक्स में फीमेल फैंस के लव लेटर्स की बाढ़

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अजय शास्त्री (बॉलीवुड सिने रिपोर्टर) 
Email: editorbcr@gmail.com
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बीसीआर (नई दिल्ली) ​हृतिक रोशन देश में एक हॉटेस्ट मेन है और साथ ही परफॉरमेंस के मामले वे एक पावरहाउस है,हृतिक  अपनी पहली फिल्म से ही फीमेल फैंस का ध्यान अपनी और आकर्षित करने में कामयाब रहे है,और उसके तुरंत बाद उन्होंने कुछ  ब्लॉकबस्टर फिल्मे की और उसके साथ ही इस सुपरस्टार की फैन फोल्लोविंग दिन ब दिन बढ़ते रही। 
हृतिक के फिल्मो ने एक नया मक़ाम बनाया है , और इसके चलते उनकी फीमेल फैंस और भी बढ़ गयी है , हृतिक के ईमेल बॉक्स फीमेल फैंस के लव मेल से भरे है कई फीमेल फैंस ने तो प्रोपोज़ भी करदिया है , और यह सिलसिला कायम शुरू ही है। ​
​इस सब से हृतिक बहुत ही अभिभूत भी  है ​और शर्मिंदा भी है।हृतिक को अब समझ नहीं आ रहा की किसकिस मेल के जवाब दे कई मेल उनके काम की तारीफ करने वाले है तो कई प्यार का इजहार करने वाले। हृतिक को हर रोज कई सौ फीमेल्स फैंस के लव लेटर्स मिल रहे है। 

फिल्म तमंचे के सेट पर रिचा चड्डा हुई असहज

फिल्म तमंचे के सेट पर रिचा चड्डा हुई असहज
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अफाक खान समीर (बॉलीवुड सिने रिपोर्टर) 
Eamail: editorbcr@gmail.com
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बीसीआर (नई दिल्ली) ​अभिनेता निखिल द्विवेदी के साथ अपनी आगामी फिल्म तमंचे को लेकर तैयार है रिचा चड्डा , जब इस फिल्म की शूटिंग उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में चल रही थी , तब यह खूबसूरत अदाकारा कुछ कारणवस्त असहज हुई इस का कारन था स्टिल फोटोग्राफर। 
रिचा को यह महसूस हुआ की ​स्टील फोटोग्राफर्स उनकी फोटोज कुछ गलत एंगल से खीच रहे थे और इस लिए वह असहज हो रही थी, रिचा के रिक्वेस्ट के बाद फोटोग्राफर्स को वहा से जाने की लिए कहा गया। 
यह सब होने के बाद रिचा अपना प्रोफेशनलिज़म दिखाते हुए वह शूट करती रही ,और फिल्म में जैसा रिचा का  बाबू नामक  किरदार जैसे ही रिचा ने अपना टफ साइड दिखाते हुए इसे घटनो के खिलाफ अपनी आवाज उठाई।
फैशन टीवी फिल्म्स प्रस्तुत और सूर्यवीर सिंह भुल्लर निर्मित तथा निखिल द्विवेदी और रिचा चड्डा अभिनीत फिल्म "तमंचे" १० अक्टूबर २०१४ को सभी सिनेमाघरो में प्रदर्शित होगी।  

बाॅलीवूड की बिंदास गर्ल सोफिया हयात ने लगाया डायरेक्टर अनिल गोयल पर अभद्र व्यवहार करने का आरोप

बाॅलीवूड की बिंदास गर्ल सोफिया हयात ने लगाया डायरेक्टर अनिल गोयल पर अभद्र व्यवहार करने का आरोप।
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रचना शर्मा (बॉलीवुड सिने रिपोर्टर) 
Email: editorbcr@gmail.com
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बीसीआर (नई दिल्ली) अपने बिंदास हरकतों से हमेशा सुर्खीयों में रहने वाली अभिनेत्री और माॅडल सोफिया हयात एक नई खबर को लेकर एक बार फिर से चर्चा मे आ गई हैं। गौरतलब है कि बीग बाॅस-7 की प्रतियोगी रह चुकी सोफिया हयात ने डायरेक्टर अनिल गोयल (जिन्होने इससे पहले क्रैकर्स और आईसी स्पाईसी जैसी फिल्में डायरेक्ट की है) पर ये इल्जाम लगाया है कि उन्होने सोफिया के साथ अभद्र व्यवहार किया है।
सोफिया हयात जिन्होने इससे पहले भी बीग बाॅस-7 में अपने प्रतियोगी अरमान कोहली पर भी आरोप लगााया था कि उन्होने उनके साथ मिस बिहेव किया था। और उन्होने इसेक खिलाफ मुम्बई पुलीस को एक एफआईआर भी किया था। अब उन्होने डायरेक्टर अनिल गोयल पर भी उनके साथ मिस बिहेव करने का आरोप लगाया है। सूत्रों की माने तो ये पूरा वाकया आज 3 साल पहले का है जब डायरेक्टर अनिल गोयल ने उन्हें अपनी एक फिल्म ‘‘भाई का माल है‘‘ कि लिए साईन किया था। सोफिया के मुताबिक अनिल गोयल ने काफी कम साईनिंग अमाउंट पर उनको साईन किया था। सोफिया ने भी फिल्म के लिए हामी भर दी थी क्योंकि वो इंडस्ट्री में नई आई थी और उन्हें बाॅलीवूड में अपने कदम जमाने के लिए एक मौके की तलाश थी। तीन साल पहले सोफीया अनील के साथ अपनी फिल्म ‘‘भाई का माल है‘‘ की महुरत के लिए दिल्ली भी आई थी और उन्होने बाबा रामदेव के डुप्लीकेट के साथ कुछ सीन भी शुट किये थें। पर उसके काफी दिन गुजर जाने के बाद कोई बात नहीं बनी। तीन साल बाद एक बार फिर अनिल गोयल ने सोफिया हयात को बीग बास-7 में देखकर एक बार फिर अपनी फिल्म के लिए अप्रोच किया। पर इस बार सोफिया ने फिल्म करने से साफ इनकार कर दिया क्योंकि एक तो काॅन्ट्रैक्ट भी खत्म हो गया था दूसरा अनील गोयल साईनिंग अमांउट ज्यादा नहीं दे रहें थें।
सोफिया के इनकार करने से तिलमिलाए अनील गोयल ने सोफिया को अभद्र मैसेज कर दिया। जिसमें लिखा था कि ‘‘तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मेरी फिल्म में काम करने से मना करने की, तुम तो प्रोस्टीच्युट हो और पैसों के लिए तुम अपना जिस्म दिखाती रहती हो।‘‘ इस मैसेज को देखकर सोफिया आग-बबूला हो गई और उसके बाद सोफिया अनिल के साथ सारे काॅन्टैक्ट तोड़ दिये। पर इतना सब हो जाने के बाद भी अनील गोयल ने एक बार फिर से सोफिया को अपनी फिल्म काम करने का आॅफर दिया। पर इस बार सोफिया ने अपने गुस्से को ठंडा करते हुए कहा कि अगर तुम मुझे बीजनेस क्लास की टीकट दोगे तो हीं मैं फिल्म में काम करूंगी वरना नहीं। इस पर अनील गोयल ने कहा ‘‘ मैं बीजनेस क्लास की टीकट तो नहीं दूंगा हाॅ पर इतना जरूर है कि मैं अपनी अगली फिल्म में तुम्हें साईन करने का वादा करता हूॅ। इस पर सोफिया ने फिल्म में काम करने से साफ इनकार कर दिया और कहा ‘‘जिस आदमी ने मेरे साथ इतना बुरा व्यवहार किया उसके साथ मैं दूबारा काम नहीं करूगीं। मेरा जमीर मुझे इसकी इजाजत नहीं देता‘‘।

Friday, September 19, 2014

जल्द आप सब टी वी पर देखेंगे "फैमिली अंताक्षरी # बैठे बैठे क्या करें" धारावाहिक

जल्द आप सब टी वी पर देखेंगे "फैमिली अंताक्षरी # बैठे बैठे क्या करें" धारावाहिक 
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अजय शास्त्री / अफाक खान समीर
 (बॉलीवुड सिने रिपोर्टर)
Email: editorbcr@gmail.com
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बीसीआर (नई दिल्ली) साईं बाबा प्रोडक्शन द्वारा निर्मित धारावाहिक "फैमिली अंताक्षरी # बैठे बैठे क्या करें" की पूरी स्टारकास्ट आज प्रमोशन के लिए पहुंची. इस धारावाहिक को सब टी वी पर २७ सितम्बर को प्रसारित किया जा रहा है, अंताक्षरी के साथ साथ यह एक गेम शो भी है, इसमें कई ऐसे राउंड है जिनको भारतीय टेलीविज़न पर कभी नहीं देखा गया. इस धारावाहिक में एंकर की भूमिका निभा रहे है प्रतिभाशाली कलाकार अन्नू कपूर, मंत्रा, बहुमुखी प्रतिभा की धनी सुगंधा मिश्रा.

फिल्म समीक्षा: खूबसूरत

फिल्म समीक्षा: खूबसूरत 

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समीक्षक: अजय शास्त्री 
(संपादक: बॉलीवुड सिने रिपोर्टर)
Email: editorbcr@gmail.com
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प्रमुख कलाकार: सोनम कपूर, फवाद खान, किरण खेर और रत्ना पाठक।
निर्देशक: शशांक घोष
संगीतकार: स्नेहा खनवलकर
रेटिंग: चार स्टार 
अवधि: 130 मिनट

बीसीआर (नई दिल्ली) हृषिकेष मुखर्जी की 'खूबसूरत' के मुकाबले, शशांक घोष की 'खूबसूरत' एक दम अलग है क्योंकि फिल्म की कहानी अलग है इस फिल्म कहानी में एक अनुशासित और कठोर माहौल दिखाया गया है जो आज के माहौल के बच्चे पसंद नहीं करते. परिवार के मुखिया  की बीमारी के चलते परिवार में चुलबुली लेडी डॉक्टर आती है और परिवार का माहौल बदल देती है। निर्देशक शशांक घोष की 'खूबसूरत' सामंती व्यवहार और आधुनिक सोच-समझ के द्वंद्व को रोचक तरीके से पर्दे पर ले आती है।
एक हादसे से राजसी परिवार में पसरी उदासी इतनी भारी है कि सभी मुस्कराना भूल गए हैं। वे जी तो रहे हैं, लेकिन सब कुछ नियमों और औपचारिकता में बंधा है। परिवार के मुखिया घुटनों की बीमारी से खड़े होने और चलने में समर्थ नहीं हैं। उनकी देखभाल और उपचार के लिए फिजियोथिरैपिस्ट मिली चक्रवर्ती का आना होता है। दिल्ली के मध्यवर्गीय परिवार में पंजाबी मां और बंगाली पिता की बेटी मिली चक्रवर्ती उन्मुक्त स्वभाव की लड़की है। वह अपनी मां को उनके नाम से बुलाती है। राजप्रासाद के शिष्टाचार से अपरिचित मिली के मध्यवर्गीय आचार-व्यवहार से रानी साहिबा को खीझ होती रहती है। उसके आगमन और संवाद से परिवार में आरोपित अनुशासन में खलल पड़ती है। हालांकि इस कोशिश में कई दृश्यों में मिली को उजड्ड और गंवार की तरह हम देखते हैं। वह अपनी मुखरता और खुलेपन से रानी साहिबा के अलावा परिवार के सभी सदस्यों की प्रिय बन जाती है। हिंदी फिल्मों की एक मजबूरी प्रेम है। इस फिल्म में विक्रम सिंह राठौड़ और मिली के बीच प्रेम दिखाने के दृश्य जबरन नहीं डाले गए होते तो फिल्म सरल और स्वाभाविक रहती। कुछ अन्य दृश्यों में भी घिसे-पिटे प्रसंग रखे गए हैं। इस कमी के बावजूद फिल्म मनोरंजक और ताजगी से भरपूर है। इसकी प्रस्तुति में रंग, एनर्जी और नई सोच भी रखी गई है।
उदाहरण के लिए पंजाबी मां और बंगाली पिता की बेटी मिली के किरदार पर गौर करें। वह महानगरों में पली आज की लड़की है, जो देश की सांस्कृतिक विविधता की पैदाइश है। ऐसे परिवार हिंदी फिल्मों में दिखने लगे हैं। वहीं राजप्रासाद की जड़ता भी उजागर होती है। नियम और औपचारिकताओं में इच्छाएं दबायी जा रही हैं। महानगर से आई लड़की सपनों और सोच पर लगी गांठ खोल देती है। फिल्म में वह कहीं भी रानी साहिबा से टकराने या उन्हें सबक सिखाने की कोशिश नहीं करती। सब कुछ अपनी गति से बदलता जाता है और आखिरकार रानी साहिबा को महसूस होता है कि उन्होंने अपने सीने और कंधे पर जो बोझ उठा रखा था, वह फिजूल था। परिवार के सभी सदस्यों के साथ उसका व्यवहार अलग-अलग है। पता चलता है कि सभी अपनी जिंदगी में कुछ और चाहते हैं। यह फिल्म हिंदी फिल्मों में आ रही विविधता का भी सुंदर उदाहरण है।
मिली चक्रवर्ती की उन्मुक्तता को पर्दे पर जीवंत करने में सोनम कपूर की स्वाभाविकता दिखती है। ऐसा लगता है कि उन्हें खास मेहनत नहीं करनी पड़ी हैं, जबकि मिली के मिजाज को अंत तक निभा ले जाने में श्रम लगा होगा। सोनम कपूर ने मिली के स्वभाव को अपने हाव-भाव और अभिनय से रोचक बना दिया है। रानी साहिबा की भूमिका में रत्ना पाठक शाह की पकड़ और अकड़ किरदार के अनुकूल है। विक्रम सिंह राठौड़ की भूमिका में पाकिस्तानी अभिनेता फवाद खान अपनी प्रतिभा से मुग्ध करते हैं। उन्होंने अभिनय में संयम और शिष्टता का परिचय दिया है। राजा साहब की भूमिका में अमीर राजा हुसैन जंचे हैं। रामसेवक के छोटे किरदार में अशोक बांठिया भी नोटिस होते हैं।
हां, फिल्म में हिंदी शब्दों के प्रति बरती गई लापरवाही अखरती है। सूर्यगढ़ को सूर्यगड़ और संभलगढ़ को समभलगढ़ लिखना और मुख्य अभिनेता फवाद खान के हाथों में कडा पहना हुआ है और दिसंबर को डिसेंबर बोलना सही नहीं लगता।